1 फ़रवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया, जिसे सरकार ने युवा शक्ति और “3 कर्तव्य” की सोच पर आधारित एक महत्वाकांक्षी रोडमैप के रूप में प्रस्तुत किया है। यह बजट तेज आर्थिक वृद्धि, समावेशी विकास और कर–प्रशासन को सरल बनाने की दिशा में कई बड़े कदमों की घोषणा करता है।
1. बजट की वैचारिक रूपरेखा: 3 कर्तव्य और विकसित भारत
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने स्थिरता, राजकोषीय अनुशासन, 7% के आसपास की उच्च विकास दर और मध्यम मुद्रास्फीति को बनाए रखा है। आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) को मार्गदर्शक बनाकर घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और आयात–निर्भरता घटाने पर निरंतर जोर दिया गया है।
इस बजट को तीन कर्तव्यों (3 Kartavya) पर आधारित बताया गया है:
- पहला कर्तव्य – आर्थिक वृद्धि को तेज करना और उसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाना, प्रतिस्पर्धा व उत्पादकता बढ़ाना और वैश्विक झटकों के प्रति मजबूती लाना।
- दूसरा कर्तव्य – लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता को विकसित कर उन्हें समृद्धि के सफर में साझेदार बनाना।
- तीसरा कर्तव्य – “सबका साथ, सबका विकास” के विज़न के तहत हर परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर तक अवसर व संसाधन पहुँचाना।
यही सोच आगे चलकर युवाओं, किसानों, महिलाओं, MSME, सेवाक्षेत्र, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर सुधारों में दिखती है।
2. विनिर्माण और उद्योग के लिए बड़े कदम
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने के लिए उच्च–प्रौद्योगिकी सेक्टरों में आक्रामक निवेश और नीति–समर्थन जारी रहेगा।
मुख्य घोषणाएँ:
- बायोफार्मा SHAKTI योजना
बायोलॉजिकल दवाओं और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “बायोफार्मा SHAKTI” योजना पर अगले 5 साल में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 3 नए NIPER और 7 मौजूदा NIPER को अपग्रेड किया जाएगा, साथ ही 1000 से अधिक क्लिनिकल ट्रायल साइटों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
- India Semiconductor Mission 2.0
ISM 1.0 के बाद अब ISM 2.0 लाया जा रहा है, जिसमें उपकरण, मटीरियल, फुल–स्टैक भारतीय IP डिज़ाइन और मज़बूत सप्लाई चेन पर फोकस होगा। यह पहल सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में रिसर्च सेंटर और स्किल्ड मैनपावर तैयार करने पर ज़ोर देगी।
- इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का विस्तार
2025 में शुरू की गई इस योजना में पहले से तय लक्ष्य से दुगुने निवेश कमिटमेंट आ चुके हैं, इसलिए इसकी आउटले को 22,919 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया है।
- रेयर अर्थ और केमिकल पार्क
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है ताकि माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले। साथ ही 3 नए केमिकल पार्क “क्लस्टर–आधारित प्लग एंड प्ले मॉडल” पर स्थापित करने की योजना है।
- टेक्सटाइल सेक्टर के लिए समग्र कार्यक्रम
टेक्सटाइल के लिए 5 भागों वाला एक समेकित कार्यक्रम लाया गया है, जिसमें नेशनल फाइबर स्कीम, टेक्सटाइल एक्सपेंशन एवं एम्प्लॉयमेंट स्कीम, नेशनल हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम, Tex-Eco Initiative और Samarth 2.0 शामिल हैं। इसके अलावा मेगा टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के ज़रिये खादी, हैंडलूम और ग्रामीण उद्योगों को वैश्विक ब्रांडिंग और बाज़ार से जोड़ने की योजना है।
इन उपायों का लक्ष्य रोज़गार सृजन के साथ–साथ MSME, लेगसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर और खेल–उद्योग जैसे क्षेत्रों को भी “चैंपियन” बनाना है।
3. इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहर और हरित अर्थव्यवस्था
बजट में सार्वजनिक पूंजी व्यय (Public Capex) को 2025-26 के 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। यह राशि सड़कों, रेलवे, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर खर्च होगी।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- Infrastructure Risk Guarantee Fund – निजी डेवलपरों के जोखिम को कम करने के लिए आंशिक गारंटी देने वाला फंड बनाया जाएगा ताकि बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी भागीदारी बढ़े।
- Dedicated Freight Corridors और National Waterways – डंकुनी से सूरत तक नया मालवाहक कॉरिडोर, अगले 5 साल में 20 नई राष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन और वराणसी–पटना में शिप–रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा।
- Coastal Cargo Promotion Scheme – रेल और सड़क से माल को जलमार्ग और तटीय शिपिंग की ओर मोड़कर 2047 तक inland waterways व coastal shipping की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 12% करने का लक्ष्य रखा गया है।
- City Economic Regions – टियर–2, टियर–3 शहरों और मंदिर–टाउन को “सिटी इकोनॉमिक रीजन” के रूप में विकसित कर प्रति CER 5 साल में 5000 करोड़ रुपये देने की योजना है।
- हाई–स्पीड रेल कॉरिडोर – मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी के बीच 7 हाई–स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
साथ ही, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) के लिए 5 साल में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो स्टील, सीमेंट, पावर, रिफाइनरी और केमिकल सेक्टर में डी–कार्बनाइजेशन को तेज करेगा।
4. सेवाक्षेत्र, शिक्षा और युवाओं के लिए अवसर
बजट का बड़ा फोकस सेवाक्षेत्र, स्किल डेवलपमेंट और युवा रोजगार पर है, क्योंकि सरकार का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक सेवा–निर्यात में 10% हिस्सेदारी हासिल करना है।
मुख्य घोषणाएँ:
- High-Powered ‘Education to Employment and Enterprise’ Standing Committee
यह उच्च स्तरीय समिति सेवाक्षेत्र में रोज़गार व निर्यात की संभावनाएँ, AI और नई तकनीकों का नौकरियों पर असर, तथा स्किल–री–स्किलिंग के उपाय सुझाएगी।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में Allied Health Professionals
10 प्रमुख डिसिप्लिन (जैसे ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी आदि) में Allied Health Professionals की संख्या बढ़ाने के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड और नए संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जिससे 5 साल में 1 लाख AHP तैयार होंगे।
- केयर इकोसिस्टम और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म
1.5 लाख मल्टी–स्किल्ड केयरगिवर ट्रेन करने की योजना है, जो बुज़ुर्गों, दिव्यांगजनों और अन्य ज़रूरतमंदों की देखभाल में नई रोजगार–संभावना पैदा करेगी। पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित कर भारत को मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा
3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स का अपग्रेडेशन और जामनगर स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को मज़बूत किया जाएगा।
- AVGC और क्रिएटिव इकोनॉमी
AVGC (Animation, VFX, Gaming, Comics) सेक्टर के लिए 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी, जिससे लाखों युवाओं को नए करियर पाथ मिलेंगे।
- पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और स्पोर्ट्स
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, 20 आइकॉनिक साइट्स पर 10,000 गाइड्स का अपस्किलिंग प्रोग्राम, नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड, और “खेโล इंडिया मिशन” के माध्यम से स्पोर्ट्स इन्फ्रा और टैलेंट डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा।
ये सभी कदम मिलकर “युवा भारत” के लिए रोजगार, उद्यम–सृजन और ग्लोबल–स्तर की स्किल्स तैयार करने का रोडमैप पेश करते हैं।
5. किसानों, ग्रामीण भारत, महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए प्रावधान
तीसरे कर्तव्य के तहत बजट किसानों, ग्रामीण महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए कई लक्ष्यित योजनाएँ लेकर आता है।
- कृषि और allied क्षेत्रों में विविधीकरण
500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के समेकित विकास, तटीय मत्स्य–मूल्य–श्रृंखला को मज़बूत करने और महिलाओं व स्टार्टअप्स को जोड़ने की योजना है। पशुपालन में क्रेडिट–लिंक्ड सब्सिडी, आधुनिक इकाइयाँ और डेयरी–पोल्ट्री–फोकस्ड वैल्यू–चेन बढ़ाने की घोषणा की गई है।
- उच्च मूल्य कृषि (High Value Agriculture)
नारियल, चंदन, कोको, काजू, अगार, अखरोट, बादाम और पाइन नट्स जैसी फसलों को प्रोत्साहन, नारियल प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए Coconut Promotion Scheme और 2030 तक Indian Cashew व Indian Cocoa को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- Bharat-VISTAAR (AI आधारित कृषि सलाह)
AgriStack और ICAR के कृषि पैकेजों को AI से जोड़कर बहुभाषीय “Bharat-VISTAAR” टूल लॉन्च किया जाएगा जो किसानों को कस्टमाइज़्ड सलाह, जोखिम कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगा।
- महिला उद्यमिता – SHE Marts
‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के अगले चरण में महिलाओं को केवल क्रेडिट–लिंक्ड जीविकोपार्जन से आगे बढ़ाकर उद्यम–मालकिन बनाने के लिए क्लस्टर स्तर पर समुदाय–स्वामित्व वाली SHE-Marts स्थापित की जाएंगी।
- Divyangjan Kaushal Yojana और Divyang Sahara Yojana
IT, AVGC, हॉस्पिटैलिटी, F&B जैसे सेक्टरों में दिव्यांगजनों के लिए कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग, ALIMCO के माध्यम से उच्च–गुणवत्ता सहायक उपकरणों का उत्पादन बढ़ाना और Assistive Technology Marts स्थापित कर उन्हें आसानी से इन उपकरणों तक पहुँच उपलब्ध कराना शामिल है।
- मानसिक स्वास्थ्य और आपात/ट्रॉमा केयर
उत्तर भारत के लिए नया NIMHANS-2 और रांची व तेजपुर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय apex संस्थान में अपग्रेड करने की घोषणा की गई है। ज़िला अस्पतालों में आपातकालीन व ट्रॉमा केयर क्षमता 50% तक बढ़ाई जाएगी।
6. राजकोषीय अनुशासन और टैक्स सुधार
(A) राजकोषीय स्थिति
सरकार ने दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर ध्यान दिया है:
- 2030-31 तक सरकारी ऋण–GDP अनुपात को 50±1% पर लाने का लक्ष्य। 2026-27 के लिए यह अनुपात 55.6% अनुमानित है, जो 2025-26 के 56.1% से कम है।
- 2025-26 तक राजकोषीय घाटा 4.5% से नीचे लाने का वादा निभाते हुए 2025-26 के लिए घाटा 4.4% और 2026-27 के लिए 4.3% रखा गया है।
2026-27 में कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ और गैर–ऋण प्राप्तियाँ 36.5 लाख करोड़ अनुमानित हैं; नेट टैक्स रेवेन्यू 28.7 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।
(B) प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes) – मुख्य बदलाव
- नया Income Tax Act, 2025
1 अप्रैल 2026 से पुराना आयकर अधिनियम, 1961 हटकर नया Income Tax Act, 2025 लागू होगा, जिसमें सरल नियम और फिर से डिज़ाइन किए गए फॉर्म होंगे ताकि सामान्य करदाताओं के लिए अनुपालन आसान हो सके।
- Ease of Living उपाय
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए क्षतिपूर्ति–ब्याज पर कर और TDS दोनों से छूट।
- ओवरसीज़ टूर पैकेज पर TCS 5%/20% से घटाकर सीधा 2% (किसी लिमिट के बिना)।
- शिक्षा और मेडिकल LRS पर TCS 5% से घटाकर 2%।
- रिटर्न संशोधन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च, नाममात्र शुल्क के साथ।
- ITR 1–2 की डेडलाइन 31 जुलाई; नॉन–ऑडिट बिज़नेस/ट्रस्ट्स के लिए 31 अगस्त प्रस्तावित।
- छोटे करदाताओं के लिए Foreign Asset Disclosure Scheme (FAST-DS)
छोटे करदाताओं (छात्रों, युवा प्रोफेशनल, टेक एम्प्लॉइज़, रिलोकटेड NRI आदि) के लिए विदेशी आय/संपत्ति की वन–टाइम घोषणाएँ करके दंड और अभियोजन से राहत पाने की स्कीम लाई गई है, जिसमें अलग–अलग कैटेगरी के लिए अलग सीमा और टैक्स/फीस संरचना है।
- Penalty और Prosecution में नरमी
- अस्सेसमेंट और पेनल्टी को एक ही आदेश में समेटना, ताकि मल्टीपल प्रोसीडिंग न चलें।
- अनेक तकनीकी डिफॉल्ट पर पेनल्टी को “फीस” में बदला गया है।
- अधिकांश अपराधों के लिए अधिकतम सज़ा 7 वर्ष के बजाय 2 वर्ष, और कई छोटे मामलों में केवल जुर्माना।
- कॉरपोरेट टैक्स और MAT सुधार
- MAT को “फाइनल टैक्स” बनाकर इसकी दर 15% से घटाकर 14% करने का प्रस्ताव है और आगे MAT क्रेडिट इकट्ठा नहीं होगा।
- पुराने MAT क्रेडिट का उपयोग केवल नई टैक्स–रेजीम में शिफ्ट होने वाली कंपनियाँ सीमित सीमा तक कर पाएँगी।
- शेयर बायबैक और कैपिटल मार्केट
- बायबैक पर टैक्स अब डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में लगेगा; प्रमोटर्स के लिए अतिरिक्त बायबैक टैक्स से प्रभावी दर 22% (डोमेस्टिक) और 30% (अन्य) होगी।
- F&O पर STT दरें बढ़ाई गई हैं – फ्यूचर्स पर 0.02% से 0.05% और ऑप्शंस प्रीमियम व एक्सरसाइज़ दोनों पर 0.15%।
- IT सेक्टर और वैश्विक निवेश आकर्षण
- सभी IT/ITES/कॉन्ट्रैक्ट R&D को एक ही “Information Technology Services” कैटेगरी में लाकर 15.5% सेफ हार्बर मार्जिन और 2,000 करोड़ तक की सेफ–हार्बर सीमा।
- भारत में डेटा सेंटर सेवाओं का उपयोग कर दुनिया भर में क्लाउड सर्विस देने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक टैक्स–हॉलिडे।
- टोल मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी कंपनियों द्वारा दिए गए कैपिटल गुड्स आदि पर 5 वर्ष की टैक्स–छूट, और भारत में लंबे समय तक काम करने वाले विदेशी विशेषज्ञों की नॉन–इंडिया सोर्स्ड ग्लोबल इनकम पर कर–छूट।
(C) अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes)
- व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित सभी dutiable वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी 20% से घटाकर 10% की गई है।
- लिथियम–आयन सेल (बैटरी एवं बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम), सोलर ग्लास के लिए सोडियम एंटीमोनेट, और न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कई वस्तुओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाई गई है।
- कैंसर की दवाइयों सहित 17 दवाओं और 7 नई रेयर–डिज़ीज़ दवाओं पर व्यक्तिगत आयात हेतु कस्टम ड्यूटी छूट दी गई है।
- कूरियर एक्सपोर्ट पर 10 लाख रुपये की वैल्यू–कैप हटाई गई है ताकि छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप वैश्विक ई–कॉमर्स बाज़ार तक आसानी से पहुँच सकें।